दिग्गी की धरना पॉलिटिक्स

भोपाल। विशेष प्रतिनिधि। पूर्व मुख्यमंत्री और राज्यसभा सदस्य दिग्विजय सिंह ने मुलाकात का समय निरस्त होने पर मुख्यमंत्री निवास के सामने धरना दिया। अब 23 जनवरी को पौने बारह बजे मिलने का समय मिला है। इसके बाद धरना पॉलिटिक्स समाप्त हो गई। दिग्विजय सिंह डूब में आये किसानों का मामला मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के सामने उठाने आने वाले थे। उन्हें समय मिल भी गया था लेकिन अन्य व्यस्तताओं के कारण निरस्त कर दिया था।

दिग्विजय सिंह को समय मिल गया था लेकिन मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान को अन्य किसी काम से राजधानी से बाहर जाना पड़ गया। इसलिए मिलने का समय निरस्त कर दिया गया। इसकी सूचना दिग्विजय सिंह को मिल गई थी। यहीं से शुरू हुई धरना पॉलिटिक्स। दिग्विजय ने घोषणा की कि वे तय समय के अनुसार वहां जायेंगे और नहीं मिलने पर धरना दिया जायेगा। वह धरना दिया गया। इसी बीच मुख्यमंत्री के प्रमुख सचिव मनीष रस्तोगी ने दिग्विजय सिंह से बात करके सूचना दी गई कि उन्हें 23 जनवरी को पौने बारह बजे का समय दिया गया है। इसके बाद धरना समाप्त हो गया।

इस धरने की एक अन्य राजनीतिक बात भी सामने आई जिससे कांग्रेस के अन्दरखाने की राजनीति भी सामने आ गई। कमलनाथ और शिवराज सिंह के बीच स्टेट हेंगर पर हुई मुलाकात में मुख्यमंत्री ने नाथ को बताया कि दिग्विजय सिंह धरना दे रहे हैं। कमलनाथ ने कहा कि उन्हें इसकी जानकारी नहीं है। यह पहला अवसर होगा कि इतना बड़ा नेता धरना दे रहा है और प्रदेश कांग्रेस के अध्यक्ष को इसकी जानकारी नहीं है। इसके बाद दोनों बड़े नेताओं के बीच दूरियों पर चर्चा शुरू हो गई। जब राजनीति में ऐसी चर्चा चलती हैं तो दूर तलक जाती हैं। दिग्विजय सिंह की धरना पॉलिटिक्स तो सफल हो गई अब किसानों को कितना फायदा दिलवा पाते हैं यह देखने वाली बात होगी।

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