‘तोमर’ ने राज्यसभा में साफ कर दिया कानूनों का ‘सच’

भोपाल। जब देश के कृषि मंत्री नरेन्द्र सिंह तोमर से राज्यसभा में कांग्रेस के दो सांसदों का आमना-सामना हुआ तक लगने लगा था कि आज कुछ तो ऐसा होगा जिससे कृषि कानूनों की परत खुल जायेगी? ऐसा हुआ भी? कांग्रेस के वरिष्ठ सांसद मल्लिकार्जुन खडग़े ने कृषि कानूनों को लेकर कृषि मंत्री को टोका तो तोमर ने कहा कि खडग़े जी खेती पानी से होती है खून से खेती करना कांग्रेस को आता है भाजपा को नहीं। इसी प्रकार से जब हरियाणा से ाÓयसभा के सांसद और वहां के पूर्व मु यमंत्री भूपेन्द्र सिंह हुड्डा के पुत्र दीपेश हुड्डा ने तोमर से लोहा लिया तो दो ही मिनिट में हुड्डा के पास बोलने के लिए कुछ नहीं रहा तो मंत्री तोमर बोले अगली बार जब कृषि सुधारों पर कुछ बोलना हो तो पढ़कर आना। इस प्रकार से नरेन्द्र सिंह तोमर मुखर होते गये और अपने स्वभाव और राजनीति करने को तौर तरीकों से विपरीत खुलकर बोले। तोमर ने विपक्ष को चुनौती दी कि जिन सुधार कानूनों को आप लोग 'कालाÓ कहते हैं उसमें बताईये 'कालाÓ क्या है? विपक्ष कोई भी दमदार सदस्य इस पर बोलने नहीं उठा और न ही वे प्रावधान ही बताये गये जिनको लेकर इन बिलों की वापसी की मांग की जा रही है। इसके बाद बारी किसान नेताओं की थी। उन्हें टीवी बहस में बार-बार यह पूछा गया कि आप ही बता दीजिये कि इन कानूनों में काला क्या है? जवाब किसान नेताओं की ओर से भी नहीं आया।
कृषि सुधार बिलों में काला क्या है यह सवाल आज खुलकर पूछा गया। किसान इन कानूनों को काला कानून बता है और उसी के बाद विपक्षी नेता भी। आज प्रबुद्ध सदन में कृषि मंत्री नरेन्द्र सिंह तोमर ने आखिरकार पूछ ही लिया कि कोई बताये कि इन कानूनों में कौन सा प्रावधान काला है? हम संशोधन की बात कर रहे हैं इसका मतलब यह नहीं निकाला जाना चाहिए कि कानूनों में कोई कमी है। हम तो किसान को पूछ रहे हैं यदि बदलाव करना है तब किस बात का? किसी भी बैठक में किसानों ने इस बारे में नहीं बताया कि उन्हें कानून के इस प्रावधान में किसान विरोधी लग रहा है। केवल आशंकाओं के आधार पर डर दिख रहा है जिसका सरकार द्वारा स्पष्टिकरण दे दिया गया है। उन्होंने कुछ कानूनों का उल्लेख करते हुये कहा कि वे तो 20-22 राÓयों में पहले से लागू हैं। पंजाब में तो किसान को जेल भेजने वाला कानून शामिल है। इसके बाद मौन हो गया। लेकिन मुखर हुये दिग्विजय सिंह। उन्होंने खून से खेती करने पर सवाल पूछा गोधरा में खून की खेती हुई थी पानी से। लेकिन वे अपने स्वभाव से विपरीत गोदरा उठा गये।
किसान आन्दोलन का विदेशी कनेक्शन देखने से लगता है कि सरकार का रूख सही बदल रहा है। नरेन्द्र सिंह तोमर ने अपने रूप और स्वभाव में बदलाव सही किया है। उन्होंने बता दिया कि किसान हमारे लिए स मान का केन्द्र है लेकिन नेताओं को यह तो बताना होगा कि आखिरकार आपकी मंशा क्या है? विदेशी हरकत और लालकिला क्यों हो गया? वक्त काल के साथ बदलाव न होने से सड़ांध की संभावना हो जाती है। इसलिए आर्थिक सुधारों के साथ कृषि सुधारों की जरूरत तो है। विपक्षी दल राजनीतिक लाभ के लिए किसान नेताओं के कंधे पर सवार हैं और किसान नेता सुपर बनने की होड़ में लगे हैं। ठंडी में किसान बैठा है। किसके कारण?

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