‘डेंट’ की चिंता में 3 घंटे तक बैठे 2 बार चाय पी 2 विधायकों के पाला बदलने से भाजपा में खौफ

भोपाल। [विशेष प्रतिनिधि] आधा दर्जन भाजपा विधायकों से बात हुई। सबकी एक बात कामन थी। हमें ही नहीं नेतृत्व को भी पता था कि नारायण त्रिपाठी नाराज हैं। उनकी नाराजगी कम करने की दिशा में कोई काम नहीं हुआ। लेकिन कोई भी यह नहीं समझ पाया के शरद कौल क्यों गये? पूरे दिन भर कर्नाटक की जीत में भाजपा का नेतृत्व कहता रहा कि मौसम कभी भी बदल सकता है। शाम को कमलनाथ ने ऐसा मौसम बदला कि भाजपा का नेतृत्व खौफ में आ गया। कमलनाथ की धमक दिल्ली तक पहुंची और अमित शाह ने क्लास ले ली। देर रात तक बैठक चलती रही लेकिन कोई नतीजा नहीं निकला। आज समाचार लिखे जाने तक बैठक जारी है जिसे तीन घंटे होने को आ गये। दो बार चाय पी जा चुकी है लेकिन खौफ कम होने का नाम ही नहीं ले पा रहा है। डेंट ऐसा लगा है कि पार्टी की देशसव्यापी चमक मध्यप्रदेश से खराब कर दी।
बीती रात के समाचार छपे हैं कि पूर्व मुख्यमंत्री ने समिधा जाकर स्थिति का स्पष्टिकारण दिया। नेता प्रतिपक्ष गोपाल भार्गव की बोलती बंद हो गई क्योंकि उन्होंने सुबह ही कहा था कि एक और दो नम्बर कह दें तो शाम तक सरकार गिरा देंगे। लेकिन दो विधायक गये पाला बदल गये तो सुर बदल गये। हम तो बिल के साथ थे।
भाजपा अध्यक्ष अमित शाह ने कहा कि नाम को बट्टा लगा दिया। भाजपा चुम्बक बनी हुई है तब दो भाजपाई क्यों चले गये। जबाव देते नहीं बन रहा है। इसलिए प्रदेश भाजपा कार्यालय में तीन पदाधिकारी प्रदेश अध्यक्ष राकेश सिंह, संगठन महामंत्री सुहास भगत और नेता प्रतिपक्ष गोपाल भार्गव पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के साथ बैठे हैं। कोई सम्मान-जनक रास्ता नहीं निकल पा रहा है। चेहरा साफ करने की बात समझ में नहीं आ रही है। कोई नाम छापने की अनुमति नहीं दे रहा है। इसिलए इतना ही कह सकते हैं कि भोपाल के एक विधायक ने कहा कि डेंट लग गया। मेरा मन दुख रहा है। महाकौशल के एक विधायक ने कहा कि संगठन अपना काम नहीं कर पाया। दलबदलुओं के सामने अपने कार्यकर्ता की इज्जत ही नहीं रही। पूर्व मंत्री बोले हमारे पास तो कोई काम नहीं था सब नेता जी जाने। कमलनाथ के एक दांव से भाजपा मंथन में चली गई।
संगठन ने अपना काम नहीं किया
भाजपा के दो विधायकों ने एक स्वर में कहा कि हम प्रभाव दिखाने के लिए नेताओं को आयात करते हैं। जिनके पास नेतृत्व करने की जिम्मेदारी है वे यह ध्यान नहीं देते कि संगठन में काम करने वाले कार्यकर्ताओं में इतना निखार हो जाये कि वे चुनाव में विजयी हो सकें। कई बार दलबदल करने का चुनाव में लाभ हो सकता है लेकिन ऐसा करना संगठन की सेहत के लिए अच्छज्ञ नहीं होता है। संगठन ने नारायण त्रिपाठी और अन्य नेताओं को लेकर सही से काम नहीं किया इसलिए विधायक को दल बदलने जैसी स्थिति तक जाना पड़ा। हम लालच तो कह सकते हैं लेकिन हमारे काम की समीक्षा करना चाहिए ताकि अपनी गलती को भी सुधारा जा सके। प्रदेश में भाजपा का संगठन अब चरमरा रहा है। नेताओं के पास कार्यकर्ता नहीं हैं जबकि पहले काम करने वाले लोग हुआ करते थे। अब वे पीछे कर दिये गये हैं।
आदतन दल बदलू है नारायण त्रिपाठी
भाजपा के वरिष्ठ नेता और पूर्व मंत्री नरोत्तम मिश्रा ने कहा कि कांग्रेस ने शुरूआत कर दी अब समापन भाजपा को करना है। उन्होंने कहा कि नारायण त्रिपाठी पहले सपा से कांग्रेस में गये। फिर कांग्रेस से भाजपा में आये। अब भाजपा से कांग्रेस में जा रहे हैं। वे आदतन हेबिचुअल दलबदलु हैं। उनका पता था कि वे दल बदल सकते हैं। लेकिन शरद कौल कीजानकारी नहीं थी। यह हमारे लिए सदमें ही बात है। उन्होंने कहा कि आगे का निर्णय नेतृत्व को लेना है। जैसा निर्णय नेतृत्व का होगा वैसा परिणाम सामने आ जायेगा।
भाजपा के सभी विधायक इस बात से सहमत हैं कि नेतृत्व को बात गंभीरता से लेना चाहिए। हम विपक्ष में हैं यह जरूर समझना चाहिए। लेकिन इसका प्रभाव भाजपा के पख में ही जायेगा। अब दलबदलुओं का दोबारा विधायक बनना जनता स्वीकार नहीं करेगी। लेकिन त्रिपाठी सभी विरोधों के बाद भी चुनाव जीत जाते हैं।

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