जोबट :  भाजपा कांग्रेस मे मुकाबला

झाबुआ । अनिल श्रीवास्तव। जोबट उपचुनाव में नाम वापस लेने के बाद अब कांग्रेस व भाजपा मे सीधे मुकाबला होना है। वही दीपक भूरिया के नाम वापसी के संकट के बादल टल गए हैं। हालांकि नाम वापसी के बाद अभी भी कुल छह प्रत्याशी मैदान में हैं। जिसमे भाजपा की सुलोचना रावत व कांग्रेस के महेश पटेल मुख्य रुप से प्रतिद्वंदी हैं। शेष चार अन्य निर्दलीय भी मैदान मे डटे हुऐ हैं। वही राजनीति दल जातिगत आधार पर पार्टियां वोटों का धु्रवीकरण करने के प्रयास कर सकते हैं।

नाम वापसी के बाद वर्तमान मे जोबट उपचुनाव का परिदृष्य साफ होता गया है। जिसमे मुख्य मुकसबला भाजपा व कांग्रेस के बीच है। फिर भी चर्चा चौराहे के अनुसार यहा पर कांग्रेस वर्सेज कांग्रेस की ही टक्कर है। यहा पर कांगेस के अधिकृत प्रत्याशी महेश पटेल हैं। वही कांग्रेस छोड़ कर कुछ दिन पुर्व भाजपा मे आई सुलोचाना रावत के बिच सीधी टक्कर है।

कांग्रेस छोडक़र भाजपा में आई पूर्व विधायक सुलोचना रावत ने सत्ता व संगठन की ताकत के साथ अपना पर्चा जमा किया। रैली में सत्ता की शक्ति का पुरजोर उपयोग किया। नामांकन दाखिल के समय भाजपा के राष्ट्रीय महासचिव कैलाश विजयवर्गीय, राज्यसभा सांसद डॉ सुमेरसिंह सोलंकी, सांसद गुमानसिंह डामोर व गजेन्द सिंह पटेल, मंत्री ओमप्रकाश सखलेचा व महेंद्रसिंह सिसोदिया, रमेश मेंदोला, रंजना बघेल, जयदीप ठाकुर सहित कई दिग्गज नेता और जनप्रतिनिधि उपस्थित थे।

राजनीति में सुलोचना का करियर कि बात करे तो अपने ससुर विधायक अजमेर सिंह की मृत्यु के बाद राजनीति में आई सुलोचना रावत ने कांग्रेस में 25 साल निकाले। इस दौरान वे चार बार चुनाव लड़ी, 3 बार जीती, एक बार हारी। 1998 में प्रदेश सरकार में नर्मदा घाटी विकास राज्यमंत्री भी बनी। वही माधोसिंह डाबर से 3 बार आमना सामना हुआ। 2 बार जीती एक बार हार गई। पिछले 2018 विधानसभा चुनाव में कांग्रेस ने कलावती भूरिया को टिकिट दिया था। इससे नाराज होकर विशाल रावत ने निर्दलीय चुनाव लड़ा व 32 हजार वाटो को प्राप्त होने से कांग्रेस को जीत के लिए कड़ी मशक्कत करना पड़ी थी तथा मतगणना के आखरी चरणों मे सिर्फ 1845 वोट से जीत नसीब हुई थी। इन्ही 32 हजार वोट पर भाजपा कि पैनी नजर व जीत का गणित बैठा हुआ है। क्योंकि जोबट विधानसभा सीट एक दो अपवाद को छोडक़र परम्परागत रूप से कांग्रेस कि सीट रही है। वही भाजपा मे सुलाचना के आने व पार्टी का टिकिट मिलने के बाद पार्टी के अन्दर विरोध की सुगबुगाट सुनाई दे रही है। ऐसे में समय रहते भाजपा ने असंतुष्ट कार्यकर्ताओ अगर नहीं साधा तो परिणाम विपरित हो सकते है।

 वही कांग्रेस के अधिकृत प्रत्याशी महेश पटेल अलीराजपुर क्षेत्र के कद्दावर कांग्रेसी नेता माने जाते है। विगत कई वर्षो से अलिराज पुर जिले में कांगे्रस की कमान संभाले हुए हैं। भाजपा के 15 वर्षो के राज के दैरान श्री पटेल ने पार्टी मे एक जुटता बनाई रखी है। अविभाजित झाबुआ जिले में जिला पंचायत के उपाघ्यक्ष भी रह चुके हैं। वही पत्नि सेना पटेल दो बार अलिराजपुर नगर पालीका अध्यक्ष रह चुकी हैं। सेना पटेल 2013 में चुनाव लड़ी व पराजय का सामना कर चुकी हैं। महेश पटेल ने वर्ष 2003 व 08 में दो बार विधानसभा चुनाव लड़ा पर जीत नहीं सके। इनके पिता स्व वेस्ता पटेल विधायक रह चुके हैं। छोटे भाई मुकेश पटेल वर्तमान में अलिराजपुर से विधायक है।  महेश पटेल के पास काफी लम्बा राजनितिक अनुभव है। मिलनसार व सेवाभावी होने से जिले में उनकी लोकप्रियता किसी से कम नहीं है।

वर्तमान में शारदीय नवरात्रि का समापन हो गया है। अब जोबट विधानसभा क्षेत्र मे राजनितिक दलों का चुनाव प्रचार जोर पकड गया है। सभी प्रत्याशी मतदाता को लुभाने के लिए घर-घर जाकर अपने पक्ष में मतदान की अपील कर रहे हैं। मतदान के बाद ऊंट किस करवट बैठेगा यह भविष्य कि बात है। बावजूद सभी प्रत्याशी रिकार्ड मतों से अपनी-अपनी जीत के दावा कर रहे हैं। परिणाम जो भी हो पर पूर्व विधायक कलावती भुरिया का कोराना से आकस्मिक निधन हो जाने से रिक्त हुई इस सीट पर घमासान होने की पूरी संभावना है। भाजपा इस पर पुन: कब्जा करने कि पुरजोर कोशिश कर रही है। वहीं कांग्रेस अपनी इस परंपरागत सीट पर अपनी विजय के प्रति आश्वस्त है। वही महेश पर बाहरी उम्मीदवार होने का ठप्पा लगा है।

हांलाकि दीपक भूरिया के नामंाकन भरने के बाद से ही कांग्रेस की सांसे उखने लगी थी। कारण दीपक ने एक बड़ी रैली के साथ नामंाकन फार्म भरा था जिसमे कातिलाल भूरिया व विक्रांत भूरिया कि खिलाफ जमकर नारेबाजी हुई थी। जिससे कांग्रेस को बड़ा झटका लगा था। किन्तु पार्टी के वरिष्ठ नेताओं के समझाने के बाद दीपक ने सहदर्यता दिखाते हुए अपना नाम वापस ले लिया। वही कांग्रेस ने डेमेज कन्ट्रोल कर राहत कि सांस ली।

गत दिनो प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिह चौहान के जोबट विधानसभा मे दो दिवसीय दोरे में लगातार आम सभा कर जनता से सीधे संवाद करने के कारण पूरी तरह से भाजपा के पक्ष में महौल बनता साफ दिखाई दे रहा है। वहीं शिवराज सिंह के इस दौरे से कांग्रेस की पेशानी पर बल दिख रहे हैं। हालांकि कांग्रेस के कमलनाथ सहित दिग्गज नेताओं कि क्षेत्र मे दोरे होना अभी बाकी हैं। वे कितना प्रभावित कर पाएंगे देखना होगा। अभी तक के समीकरणों और क्षेत्र की भावनाओं को समझने पर यह कहा जा सकता है कि कांग्रेस को सीट बचाने के लिए खासा संघर्ष करना होगा।

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