‘जियोस’ की बैठक में उठा सबसे बड़ा ‘जनहित’

भोपाल (सुरेश शर्मा)। जिला योजना समिति की बैठक में प्रभारी मंत्री, क्षेत्र के जनप्रतिनिधि और जिले के आला अफसर बैठते हैं। यहां समस्याओं पर जनप्रतिनिधि ध्यान आकर्षित करते हैं और प्रभारी मंत्री जिले के आला अफसरों से उनके निपटान के लिए कहता है। इस बैठक में ऐसा ही एक गंभीर और अति महत्व का विषय आया। भाजपा के दो बार के विधायक रामेश्वर शर्मा ने गंभीर मुद्दा उठाते हुए कहा कि यह कैसा न्याय है कि बापू की कुटिया को दस बजे बंद करा दिया जाता है लेकिन जम-जम देर रात तक खुले रहते हैं। न्याय होना चाहिए। शर्मा की इस बात को ठीक वैसे ही सुना गया जैसे मुख्यमंत्री की बात को अधिकारी लोग सुनते हैं। हालांकि जम-जम का नाम आते ही अपनी कौम के लिए समर्पित कांग्रेस विधायक आरिफ मसूद ने विरोध किया और कह दिया कि देखते हैं जम-जम को कौन बंद करायेगा? इस गंभीर जनहित के विषय पर जिला योजना समिति ने सभी कामों को छोडक़र ठोस प्रयास करने की बात कही। स्वयं प्रभारी मंत्री भूपेन्द्र सिंह ने भी इसे गर्मी, पानी की किल्लत और बिजली की अघोषित कटौती से भी बडा और गंभीर विषय मानकर प्रशासन से ध्यान देने को कहा। आखिर इतना गभीर विषय जो है। जम-जम खुल जाये और बापू की कुटिया न खुले यह कैसे हो सकता है?

पहले दिन समाचार पत्रों की सुर्खियां यही गंभीर समस्या बनी। राजधानी के मीडिया मित्रों को भी सही लगा कि बिजली आये न आये, कर्मचारी रात में घंटों मशक्कत के बाद भी बिजली न सुधार पायें चलेगा। पाइप लाइन की गड़बड़ी के कारण यदि शहर को पानी न मिले तो न मिले और टेंकरों से व्यवस्था निगम न बना पाये तो कोई बात नहीं, चलेगा। गर्मी में पारा बढऩे से प्राणी मात्र परेशान है तो यह प्रकृति की समस्या है हमें इससे क्या लेना-देना। हमारी खबर में जम-जम और बापू की कुटिया का अधिक महत्व है। इसे प्राथमिकता देनी चाहिए और दी गई। इससे एक फायदा और है दो विधायकों की फोटों खबर में लग सकती है जो हमारे पास पहले से है। समस्याओं की फोटो लेने के लिए गर्मी में कौन जाये? अच्छा एक बात और भी सराहनीय है। विधायक ने जम-जम के अधिक समय तक खुलने का विरोध किया तो प्रशासन भी बिना देर किये सक्रिय हो गया। यह प्रशासन की संवेदनशीलता है अन्यथा प्रशासन को तो देर से जागने के लिए ही जाना जाता है। यह कमीश्रर प्रणाली की सफलता पर चार चांद हैं। एसीपी का बयान आ गया। वे माडल जैसे दिखते हैं अत: उनकी फोटों के साथ खबर लगा दी गई।

बापू की कुटिया को अधिक समय तक खोलने का प्रयास नहीं हुआ अपितु जम-जम को जल्दी बंद कराने के लिए प्रशासन ने सख्ती दिखाना शुरू कर दी। यही राजधर्म है। जनहित है। प्रशासन की सक्रियता का प्रमाण-पत्र है। हो सकता है जम-जम आज से बापू की कुटिया से पहले बंद हो जाये। यह भी हो सकता है कि विधायक आरिफ मसूद साहब इसके लिए गदर फिल्म के विरोध जैसा कोई विरोध कर दें। लेकिन इतना जरूर है कि दो माननीयों के बीच में सबसे बड़े जनहित के विषय  पर टकराव चल रहा है। मीडिया रैफरी की भूमिका निभाने के लिए तैयार है। यही बड़ा जनहित है और यही बड़ी खबर।

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