‘जान’ हमारी पर उसकी रक्षा करे ‘सरकार’?

भोपाल (सुरेश शर्मा)। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की पन्द्रह मिनिट की सीख और मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान का यह कहना कि मास्क कफन से छोटा होता है बहुत कुछ साफ कर देता है? प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि टीका लगवाईये और मास्क पहनकर सुरक्षित रहिये। सरकार केवल सुविधा दे सकती है प्राण नहीं। वह तो आपको सुरक्षित रखना होंगे। उसको सुरक्षित रखने के तरीके हमारे डाक्टरों और वैज्ञानिकों ने बता ही दिये हैं। तीन बातें खास हैं। पहली, बहुत जरूरी हो तभी घर से निकलें। जान है तो जहान है। दूसरा मास्क पहले बिना घर से बाहर न निकलें और भीड़ की जगह पर जाना जरूरी हो तो डबल मास्क भी पहन सकते हैं। तीसरी बात यह है कि शरीरिक दूरी रखें। ऐसे में हमें वैक्सीन मिल चुकी है वह अलग से। अब तो 18 साल से अधिक का युवक भी वैक्सीन लगवा सकता है। सरकारी अस्पतालों में मुफ्त, राज्य अपनी व्यवस्था करें तो भी कर सकते हैं। निजी क्षेत्रों में याने कि खुले बाजार में आम दवाओं की तरह उपलब्ध भी होगी। जब बाजार में कोई दवा बाजार में उपलब्ध है तब उसमें आयु सीमा का बंधन खुद ही समाप्त हो जाता है। इसलिए यह आयु बंधन केवल सरकारी अस्पतालों में ही लागू होगा। इसलिए इन बातों का साफ मतलब यह है कि बीमारी के लिए दवा की उपलब्धता सरकार करायेगी और सुरक्षा स्वयं को करना होगी।

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने साफ कह दिया है कि लोगों की सेहत और अर्थव्यवस्था की सेहत दोनों का सन्तुलन बनाकर जीवन की गाड़ी को चलाना है। इसलिए दवाई भी और कड़ाई भी। इसका मतलब यह है कि सभी लोग वैक्सीन लें और कोरोना नियमों का अनुशासन से पालन करें। इससे इस महामारी को जीता जा सकता है। मनमोहन सिंह ने अपने स्वभाव के अनुसार विदेशी वैक्सीनों के लिए बाजार खोलने का आव्हान किया और सरकार ने तत्काल उनके सुझाव को मान लिया। यह अलग बात है कि मनमोहन के सुझाव को मानने की बात की बजाये कांग्रेस ने राहुल की वैक्सीन लगाने की आयु का सुझाव मानने को अधिक प्रचारित किया। लेकिन यह सवाल स्वभाविक है कि जान हमारी और उसकी रक्षा की जिम्मेदारी सरकार को क्यों सौंपना चाहते हैं हम? यह तो माना कि जान की रक्षा के लिए व्यवस्थाएं सरकार को करना चाहिए? लेकिन यह कैसे कोई स्वीकार कर सकता है कि सरकार पर निर्भरता ही बना लें? पिछले दिनों की बात और थीं और आज की बात अलग है। पहले सुविधाए, समझ और संसाधन नहीं थे आज तो हैं।

मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने भी अपने संबोधन में साफ कर दिया था कि मास्क कफन से छोटा होता है। मतलब जो गाइड लाइन हैं उसका पालन कर लिया जाता है तब कफन की जरूरत नहीं पड़ेगी। यह मौतों का हव्वा तो बनाया जा रहा है लेकिन गाइड लाइन का पालन न करने के बारे में प्रचार का दबाव नहीं बनाया जा रहा है। इसलिए दवा, अनुशासन और धर्य हमें इस महामारी से बचा सकता है। डाक्टरों का मत है कि ईलाज से परहेज अच्छा होता है। यह आज की बात न होकर बहुत पुरानी है। इसलिए अपनी जान की रक्षा खुद करें। सरकार पर सुविधाओं का दबाव बनायें। आत्मनिर्भर भारत का यही मंत्र है।

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