ग्रामीण कारीगरों के 200 प्रॉडक्ट्स बिकेंगे ई-कॉमर्स प्लैटफॉर्म्स पर

नई दिल्ली। ग्रामीण कारीगरों को प्रोत्साहन देने के उद्देश्य से सरकार अभिनव पहल करते हुए बड़ी योजना तैयार की है। इस योजना के तहत ग्रामीण कारीगरों को भी अपने उत्पाद ई-कॉमर्स प्लैटफॉर्म्स पर बेचने की सहूलियत मिलेगी। इस योजना के तहत चुनिंदा क्लस्टर्स में प्रड्यूसर कंपनियां बनाई जाएंगी। ग्रामीण विकास मंत्रालय ने ग्रामीण इलाकों में बनाए जाने वाले 200 उत्पादों की सूची बनाई है। इन उत्पादों को सरकार के ई-कॉमर्स प्लैटफॉर्म जीईएम समेत सभी ई-कॉमर्स प्लैटफॉर्मों पर बेचा जाएगा। एक वरिष्ठ सरकारी अधिकारी ने बताया, 'हम एक जैसे उत्पादों को बनाने वाले लोगों को एकसाथ लाने और उनका समूह तैयार करने या प्रड्यूसर कंपनी बनाने की प्रक्रिया में हैं।' हालांकि फ्लिपकार्ट और ऐमजॉन पर ग्रामीण कारीगरों, खासकर महिला उद्यमियों के बनाए कुछ हैंडीक्रॉफ्ट और हैंडलूम प्रॉडक्ट्स पहले से बिक रहे हैं। इनमें बिहार की मधुबनी पेंटिंग, झारखंड की आदिवासी पेंटिंग, राजस्थान के टेराकोटा प्रॉडक्ट और भागलपुर के सिल्कवियर प्रमुख हैं। अब नई मोदी सरकार के पहले 100 दिनों के अजेंडे के तौर पर इस पहल को बढ़ाने पर विचार किया जा रहा है। इन 200 उत्पादों में फोल्डर्स, पेन होल्डर्स जैसे स्टेशनरी प्रॉडक्ट्स और गिफ्ट आइटम्स शामिल हो सकते हैं, जिन्हें स्थानीय कारीगर अपने कौशल से बनाते हैं।
अधिकारियों ने बताया कि इस पहल से ग्रामीण कारीगरों को कानूनी तौर पर ई-कॉमर्स प्लैटफॉर्मों पर प्रॉडक्ट बेचने और काफी बड़े मार्केट तक पहुंच बनाने में आसानी होगी। ग्रामीण विकास मंत्रालय ने इस काम के लिए टाटा ट्रस्ट से हाथ मिलाया है। यह ट्रस्ट नॉट फॉर प्रॉफिट के सेक्शन-25 के तहत कंपनी बनाएगा, जो ग्रामीण कारीगरों को प्रफेशनल्स सपॉर्ट मुहैया कराएगी। साथ ही सरकार इनके सहयोग से एक स्पेशल वैल्यू डिवेलपमेंट सेंटर तैयार करेगी। इस सेंटर के 4-5 रीजनल ऑफिस होंगे, जो ग्रामीण कारीगरों को वैल्यू चैन सॉल्यूशंस मुहैया कराएंगे। ये सेंटर कारीगरों को तकनीकी सहयोग के साथ डिजाइनिंग और पैकेजिंग में भी मदद करेंगे, जिससे उनकी प्रॉडक्ट की एक ग्लोबल अपील हो। सरकार की योजना प्रफेशनल फोटोग्रफर्स और कॉन्टेंट राइटर्स को भी हायर करने की है, जिससे यह सुनिश्चित किया जा सकेगा कि ई-कॉमर्स प्लैटफॉर्म पर मौजूद प्रॉडक्ट के पास कस्टमर को बताने के लिए अपनी एक कहानी हो। नेशनल रूरल लाइवलीहुड मिशन के तहत नॉन-ऐग्री लाइवलीहुड प्रॉडक्ट्स को देखने वाले विनोद नायर ने बताया, 'ई-कॉमर्स प्लैटफॉर्म पर जाने से ग्रामीण कारीगरों को ज्यादा बिक्री और अपने उत्पादों की सही कीमत पाने में मदद मिलेगी।' फिलहाल ये कारीगर केंद्रीय और राज्य स्तर पर होने वाले मेलों में अपने उत्पादों को सीधे कस्टमर्स को बेचते हैं। इन कारीगरों की पहुंच स्थानीय स्तर या उनके जिले तक ही सीमित होती है।

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