गाजीपुर बार्डर में खाली पड़े आन्दोलन वाले टेंट

नई दिल्ली। शिखर वाणी संवाददाता । गाजीपुर बार्डर पर आन्दोलन कारियों के ठहरने के लिए बनाये गये टेंट अब लगातार खाली होते जा रहे हैं। खुद राकेश टिकैत चुनाव में भाजप को हराने के लिए प्रदेशों के दौरे कर रहे हैं जबकि लोग उनका साथ छोड़ते जा रहे हैं। जिन टेंटों में 1900 प्रदर्शनकारियों के ठहरने की व्यवस्था की हुई है वहां पर दिन भर में इतने लोग भी नहीं दिखाई देते जिनके कारण कुछ भी दिखाई दे जाये। आसपास के गांव के लोगों का समूह जरूर आ जाता है लेकिन वे आते-जाते रहते हैं। इससे यह संदेश जा रहा है कि राकेश टिकैत के तबू कभी भी उखड़ सकते हैं।

विभिन्न समाचार पत्रों के प्रतिनिधियों ने इस बात की जानकारी एकत्र करने का प्रयास किया। तब जानकारी मिली कि यहां 25 बड़े, 70 मंझौले और सौ के करीब छोटे टेंट लगे हुये हैं। बड़े टेंट में 40, मंझौले में 10 और छोटे में दो आन्दोनकारी रूक सकते हैं। इस प्रकार से 1900 लोग ठहर सकते हैं।

लेकिन यहां इतने या इससे आधे भी लोग दिखाई नहीं दे रहे हैं। जो आसपास के गांव हैं वहां से लोग आते-जाते रहते हैं। लेकिन वे यहां अधिक समय तक नहीं रूकने के कारण ऐसा नहीं लगता है कि यहां कोई भीड़ वाला आन्दोलन चल रहा है। सूत्र तो यहां तक बता रहे हैं कि नरेश टिकैत को भीड़ का इंतजाम करने में पसीने आ रहे हैं। सबसे पहले यह प्रयास किया गया था कि बालियांन खाप के लोगों को आन्दोलन में इज्जत बचाने के लिए आव्हान किया गया था। लेकिन यह दाव अधिक समय तक नहीं चला। जब नरेश टिकैत के साथ अन्य दलों के नेता शामिल होने लगे तो राजनीतिक समाज में आ गई। राकेश टिकैत का पंचायतों में भाजपा का खुला विरोध करने से समाज में आक्रोश है। वे कसानों की बात करने में तो साथ हैं लेकिन राजनीतिक लाभ के लिए अलग से विचार होगा। इसलिए गाजीपुर का आन्दोलन बिखर सा गया है।

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