खुल्लम खुल्ला होने लगी है दावेदारी …. भाजपा में बन गये कई पावर सेंटर

भोपाल। [विशेष प्रतिनिधि] कुछ कम अन्तर से प्रदेश में सरकार खोने के बाद भी भाजपा सरकार बनाने के सपने देख रही है। तत्कालीन मुख्यमंत्री शिवराज सिंह अपना पांव हटाने को तैयार ही नहीं है। ऐसे में अब भाजपा के अन्दरखाने में सक्रिय पावर सेंटर अब खुलकर सामने आने लग गये हैं। कैलाश विजयवर्गीय के शक्ति प्रदर्शन के बाद जबलपुर में पार्टी प्रमुख सांसद राकेश सिंह का प्रदर्शन इसी कड़ी का हिस्सा है। ऐसे में केन्द्रीय मंत्री प्रह्लाद सिंह पटेल के समर्थकों ने सोशल मीडिया पर पटेल को अगला मुख्यमंत्री घोषित करके नये पावर सेंटर का आगाज कर दिया है। राजनीति के जानकार इसे भाजपा की आन्तरिक लड़ाई को सड़क पर आना मान रहे हैं वहीं वे इसे कमलनाथ की जीत के रूप में भी देख रहे हैं।
पन्द्रह साल तक मुख्यमंत्री रहे शिवराज सिंह चौहान का भाजपा पर एक छत्र कब्जा था। न तो कोई गुट सिर उठा पा रहा था और न ही कोई पावर सेंटर बन पा रहा था। शिवराज ने जो कह दिया वह भाजपा का लाइन बन जाता था। लेकिन केन्द्र में नरेन्द्र सिंह तोमर के ताकतवर होने से एक शक्ति केन्द्र बन गया। थावरचंद गहलोत हालांकि शक्ति केन्द्र नहीं बन पा रहे हैं लेकिन राज्यसभा में सदन के नेता के नाते उनकी अनदेखी संभाव नहीं होगी। इतनी बातें सबकी समझ में आ रही थीं।
राकेश सिंह प्रदेश अध्यक्ष हैं और कैलाश विजयवर्गीय राष्ट्रीय महामंत्री। एक ने लोकसभा में पार्टी की जीत के सूत्रधार के नाते भूमिका निभाई है तो दूसरे ने बंगाल में भाजपा को अपेक्षा से अधिक शक्ति दिलाई है। लेकिन कैलाश और राकेश का अपने-अपने क्षेत्रों में यूं शक्ति प्रदर्शन करना तत्काल समझ में नहीं आ रहा है। शिवराज सिंह के दिल्ली चले जाने के बाद यहां खालीपन दिखाने का प्रयास करने वाले नेताओं की होड़ ने यहां पावर सेंटर को जन्म दे दिया है। इसे दूसरे शब्दों में गुटबाजी भी कहा जा सकता है जो कांग्रेस की बीमारी माना जाता था।
सबसे अधिक चर्चा का विषय बन रहा है फेसबुक पर प्रह्लाद सिंह पटेल को अगले मुख्यमंत्री के रूप में पेश करने वाली एक साइट का बनना। उनके समर्थक उनको इस रूप में पेश कर रहे हैं और उसे खासा समर्थन भी मिल रहा है। हालांकि पटेल इस मानसिकता की राजनीति नहीं करते हैं फिर भी यह चौंकाने वाली घटना है।
शिवराज सिंह चौहान को सदस्यता अभियान का प्रभारी बना दिये जाने के बाद प्रदेश की राजनीति में यह चर्चा शुरू हो गई है कि उन्हें प्रदेश से दूर कर दिया गया है। जबकि एक धड़ा यह कह रहा है ऐसा मौका मिलने के बाद शिवराज परिस्थितियों को भुनायेंगे और काम करके अमित शाह के करीब होने में कामयाब हो जायेंगे। उन्होंने सभी राज्यों के सदस्यता प्रभारियों की बैठक भी आहुत कर ली है।
अब इस प्रकार के पावर सेंटर बनने पर छह महीने की सरकार का जश्र बनाने वाली कांग्रेस को लगता है कि उसकी सरकार को अस्थिर करने जैसी स्थिति खत्म हो रही है। इसे कमलनाथ का रणनीति कौशल ही समझा जा रहा है कि भाजपा के दिग्गज कुर्सी के लिए दूर-दूर खड़े इिखाई दे रहे हैं। 

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