खंडित हो रही है कि आप की छवि

मोदी का नाम जपने से जेल गये नेताओं का कैसे घटेगा दोष? (सुरेश शर्मा) भारतीय राजनीति में आम आदमी पार्टी का उदय अन्ना के आन्दोलन से हुआ था। वह आन्दोलन भ्रष्टाचार के खिलाफ लोकपाल बिल लाने के लिए था। लगभग पूरा देश उस समय आन्दोलित था। अनेक संस्थाओं ने इसके पीछे खडे होकर उसे अपना समथर्न दिया था। युवाओं का आकर्षण इतना था कि सरकार के गले में आ गई थी और किस प्रकार आन्दोलन खत्म हो इस प्रकार का प्रयास किया गया। इस आन्दोलन से निकली आप जिसने अपनी छवि को कट्टर ईमानदार के रूप में स्थापित करने का प्रयास किया। अनेक अवसरों पर लग भी कि वह इस छवि के सहारे राजनीति करके देश का नया राजनीतिक चेहरा पेश कर रही है। लेकिन दिल्ली की दोबारा सरकार संभालने के बाद आप को अपनी छवि बचाने के लिए मशक्कत करना पड़ रही है। सबसे पहले स्वास्थ्य मंत्री सत्येन्द्र जैन को जेल हुई। इसके बाद सबसे प्रभावशली नाम मनीष सिसोदिया का नम्बर आ गया। अब हाल में तो अन्दर हैं जमानत मिलेगी तब की बात है। लेकिन इन दो नेताओं के भ्रष्टाचार के मामले में जेल जाने का प्रभाव यह हुआ कि आप की कट्टर इमालदार वाली छवि पर बट्टा लग गया है। अब आप को लेकर सवाल उठने लग रहे हैं। केजरीवाल हर पाप का दोष मोदी पर डालने की रनीति पर चल रहे हैं इसका भी प्रभाव अब जनता में नहीं हो रहा है। यह तो नहीं हो सकता कि सीबीआई शराब नीति बनाने में करोड़ों के गोलमाल की जांच करे और केजरीवाल इसे मोदी द्वारा भेजा बता कर आरोपों की अनदेखी कर दें। छवि को बचाने के लिए जनता की अदालत में अब मामला चला गया है।

देश में किसी भी राष्ट्रीय राजनीति पार्टी की अपनी विचारधारा है। कांग्रेस सर्वधर्म समभाव और भाजपा राष्ट्रवाद की विचारधारा के साथ अपना विस्तार कर रही है। कांग्रेस की विचारधारा में भ्रम की स्थिति बनी इसलिए वह सत्ता की दौड़ या प्रतिस्पर्धा से बाहर हो रही है जबकि भाजपा अपनी विचारधारा के आधार पर अधिक काम करती हुई दिखाई दे रही है इसलिए साफ बहुमत के आधार पर जनता ने उसे लगातार सरकार का दायित्व सौंपा है। आप की इस प्रकार की कोई विचारधारा नहीं है। लेकिन वे भ्रष्टाचार के विरूद्ध आन्दोलन से पैदा हुए हैं इसलिए यही उनकी विचारधारा मान ली गई। उन्होंने यह भी दावा किया था कि वे एक नई राजनीतिक संस्कृति विकसित करें्रेसगे। लेकिन वह तो देश को नहीं मिली बल्कि जिस प्रकार गैर भाजपाई विपक्ष मुस्लिम मतदाताओं को प्रभावित करके अपने पक्ष में करता है वो राह आप ने भी पकड़ ली है। इसलिए उसे भी भीड़ से अलग देखना धीरे-धीरे कम होता जा रहा है। दिल्ली के बाहर पंजाब या चंडीगढ़ में आप का बढ़ता प्रभाव भाजपा के असर में सेंधमारी न होकर कांग्रेस की जड़ों में मठा डालने का प्रयास यह पार्टी कर रही है। दिल्ली और पंजाब में उसने कांग्रेस की सत्ता को छीना है। लेकिन दोनों ही स्थानों पर उसने अन्य दलों के लिए भी कोई स्थान नहीं छोड़ा है। कई चुनावों में तो यह दिखाई देता है कि वह कांग्रेस की ताकत को अपनी ओर खंीचती है जिसका लाभ भाजपा को मिलता है। गुजरात उसका उदाहरण है।

आप की ओर से बचाव किया जा रहा है कि सत्येन्द्र जैन ने मोहल्ला क्लीनिक का ऐसा विचार दिया जिसका देश की सीमाओं से पार स्वागत हो रहा है। इसी प्रकार से मनीष सिसोदिया ने सरकारी स्कूलों की शिक्षा प्रणाली में आमूल-चूल परिवर्तन करके उसे चमकदार बनाया है। इन दोनों ही बचाव की बातों से गोलमाल करने की आजादी तो नहीं दी जा सकती है। सत्येन्द्र जैन मामले में जमानत न मिलना न्यायालय के सामने अपना पक्ष ईमानदार वाला सिद्ध नहीं करने के बराबर है। अन्यथा विरोधी सरकारें यदि इसमें कोई घालमेल कर रही है तब वह न्यायालय के सामने तो बताया ही जा सकता है। लेकिन सत्येन्द्र जैन मामले में ऐसा नहीं हो पाया। जैन पौन साल से अधिक समय से तिहाड़ जेल में हैं। जेल में उनकी अनैतिकता के कई किस्से सोशल मीडिया में सामने आ चुके हैं। वे जेल मंत्री भी रहे हैं इसलिए उनकी तामीरदारी करने का सौभाग्य जेल कर्मियों को मिला है। इसी बीच एक महाठग का पत्र भी चर्चा में आया है। आप को उससे कितनी रकम मिली है इसका खुलाशा उसने खुद ही किया है। उस ठग को जेल में असुविधा न हो इसकी वसूली का जिक्र भी पत्र में है। लेकिन ठग की बात को कितना माना जाये या नहीं इसका लाभ आप के नेताओं को मिल रहा है।

मनीष सिसोदिया केजरीवाल सरकार में नम्बर दो के मंत्री रहे हैं। उनके पास 18 विभाग रहे हैं। उनकी काम करने की शैली को लेकर कोई विवाद नहीं है। यह भी सर्व मान्य है कि दिल्ली के सरकारी स्कूलों की पड़ाई को उनकी नीति ने ही सुधारा है। लेकिन वे शिक्षा के साथ आबकारी मंत्री भी हैं। दिल्ली सरकार की आबकारी नीति की पोल की जिम्मेदारी शिक्षा क्षेत्र के उनके काम के कारण दबाया तो नहीं जा सकता है। यही कारण है कि आप के नेता और प्रवक्ता स्कूल शिक्षा में उनके काम को आधार बनाकर आबकारी नीति में सीबीआई द्वारा की गई कार्रवाई की आलोचना कर रहे हैं और उसे अवांछनीय बता रहे हैं। लेकिन सीबीआई जैसा संगठन बिना आधार के इतने बड़े नाम के खिलाफ इतना बड़ा कदम तो नहीं उठा सकता है। उसे भी आप के नेताओं की भांति अपनी साख का खतरा हो जायेगा। सिसोदिया मामले में कोई भी विपक्षी नेता खुलकर सामने नहीं आया। यह राजनीतिक कारण भी हो सकते हैं लेकिन भाजपा के पुराने नेता शान्ताकुमार ने जरूर मनीष का पा लिया है।

आप के नेताओं ने अपनी छवि को बचाने के लिए प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नाम को जपने का याने कि सारा दोष उन पर बदले की भावना से काम करने का लगाया है। यह आरोप अन्य विपक्षी नेता भी लगा रहे हैं। जिन भी नेताओं पर ईडी या सीबीआई छापेमारी करती है उन नेताओं और उनके दलों को इसी प्रकार का बचाव सूझता है। वे मोदी को कोसने लगते हैं। सवाल यह है कि क्या नेताओं को खुश करने के लिए सीबीआई या ईडी अपनी गतिविधियां चलाती हैं। तब इस प्रकार के आरोप अब भी और इससे पूर्व की सरकारों पर भी लगते रहे हैं। सर्वोच्च न्यायालय ने तो सीबीआई को तोता कह दिया था। लेकिन मोदी सरकार के समय सीबीआई को इस प्रकार की तोहमत से रूबरू नहीं होना पड़ा है। ईडी की कार्यवाही के भी परिणाम जनता की जानकारी में हैं। राजनीति के शुद्धिकरण का काम सबको पसंद आ रहा है। इसलिए नरेन्द्र मोदी को कोसने का प्रयास आप के नेताओं पर लगे आरोपों को धोने का साबुन नहीं हो सकता है। मोदी द्वारा भ्रष्टाचार और आतंकवाद के खिलाफ जीरो टालरेंस की नीति अपनाने का देश में स्वागत हो रहा है जबकि नेताओं के द्वारा उसकी आलोचना की जा रही है। जनता अपने मतों के माध्यम से उसे प्रकट भी करती रही है।

अब यहां आन्तरिक राजनीति की बात करना भी उतना ही जरूरी है जितना मोदी प्रसंग की थी। केजरीवाल की राजनीति करने के तरीकों पर भी सवाल उठता जा रहा है। आप पार्टी एनजीओ वालों का समूह है। जो शोर मचाकर पहचान बनाने की नीति पर काम करते हैं। इसलिए इस पार्टी का संचालन राजनीतिक पहचान वाले नेताओं के नाम पर नहीं है। यही कारण है कि केजरीवाल को किसी चर्चित चेहरे की जरूरत नहीं है। अन्य राज्यों में भी वे एनजीओ वालों की इसी कलाकारी का लाभ उठाते हैं। जिस भी नेता द्वारा सीधे या संभावनाओं के आधार पर केजरीवाल को चुनौती दी जा सकती है या दी गई है उन्हें पार्टी के बाहर का रास्ता दिखा दिया जा रहा है। प्रशान्त भूषण, योगेन्द्र यादव और कुमार विश्वास सहित अन्य कई नाम हैं। अब नम्बर दो के मनीष सिसोदिया और नम्बर तीन के सत्येन्द्र जैन इस रास्ते कमजोर हो गये हैं। संजय सिंह ने संयम ख्रोया तो उनका हश्र भी इसी प्रकार का होगा। दूसरे राज्यसभा में जिन नेताओं को भेजा जा रहा है वे आप की विचारधारा को प्रमाणित करते हैं। इसलिए यह कहा जा सकता है कि मोदी के सर बस डालने से आप नेताओं की छवि बच नहीं सकती है। यह आप को खुद की संभालना होगा।
संवाद इंडिया

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