खंडवा में भाजपा का पक्ष कांग्रेस से मजबूत

भोपाल। विशेष प्रतिनिधि। खंडवा लोकसभा के उपचुनाव में मतदान को दस दिन के आसपास का समय बचा है। अभी तक के समीकरणों के हिसाब से भाजपा ताकतवर दिखाई दे रही है। मतदाता को रिझाने के सभी प्रयास चल रहे हैं। भाजपा की ओर से प्रदेश अध्यक्ष वीडी शर्मा और मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने पूरी ताकत झौंक रखी है तब कांग्रेस की ओर से पूर्व मुख्यमंत्री और प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष कमलनाथ अपनी ताकत लगाये हुए हैं। चुनाव प्रचार का उनका अपना तरीका है जिसके परिणाम किस प्रकार के होंगे यह परिणाम के बाद ही सामने आयेगा। दोनों ही प्रत्याशी पहली बार लोकसभा का चुनाव लड़ रहे हैं इसलिए अनुभव का आंकलन इस चुनाव में अलग प्रकार का होगा।

पिछले 8 लोकसभा चुनाव में भाजपा छह बार और कांग्रेस दो बार यहां से चुनाव जीती है। अमृत तारवाला से जब यह सीट 1991 में कांग्रेस के महेन्द्र सिंह ने छीनी तब नंदकुमार सिंह चौहान ने अगली बार ही भाजपा की जीत तय कर ली। वे लगातार यहां से सांसद रहे। 2009 में अरूण यादव ने उन्हें 49 हजार से कुछ अधिक वोटों से उन्हें हराया लेकिन फिर नंदू भैया ने उन्हें दो लाख से अधिक वोटों से पराजित अपनी सीट छीन ली। अब उनके निधन ये यह सीट रिक्त हुई है। आम चुनाव में भाजपा पौने तीन लाख वोटों से जीती थी। यह अन्तर उपचुनाव में कांग्रेस अपने प्रत्याशी राजनारायण सिंह पूरनी के दम पर पाट पाएगी?

कुछ आठ विधानसभा सीटें इस चुनाव क्षेत्र में हैं भाजपा के पास 4 सीटें हैं। एक नेपानगर कांग्रेस की विधायक का पाला बदलने और भाजपा के टिकिट पर जीतने के कारण बढ़ी है। एक निर्दलीय शेरा कांग्रेस के साथ खड़े दिखाई देते हैं। लेकिन यह सीट भाजपा की अर्चना चिटनीस की हुआ करती थी। उनका प्रभाव कम नहीं है। वोटों की संख्या भाजपा के पक्ष में अधिक दिखाई देती है इसलिए मतदान के दस दिन पहले का अनुमान भाजपा के पक्ष में जा रहा है और ज्ञानेश्वर पाटिल लोकसभा में पहुंच सकते हैं इसकी संभावना अधिक है।

कांग्रेस के नेता अपना अधिक समय भाजपा के नेताओं पर ताने मारने में बिता रहे हैं जबकि कमलनाथ का प्रभाव मुख्यमंत्री बनने के बाद कमजोर हो गया जबकि शिवराज व वीडी शर्मा की जोड़ी की चमक अधिक है।

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