किला फतह किया खुद हार गई ममता

नई दिल्ली ( विशेष प्रतिनिधि )। बड़े चक्रव्यूह को तोड़ने के बाद ममता बनर्जी कि तृणमूल कांग्रेस पश्चिमी बंगाल में सरकार बनाने को तो कामयाब हो गई लेकिन नंदीग्राम से मुख्यमंत्री चुनाव हार गई। उन्हें कभी उन्हीं के साथ ही रहे शुभेंदु अधिकारी ने 1956 वोटों से पराजित किया। हालांकि कुछ तकरार के बाद उन्होंने हार को स्वीकार कर लिया। यह राजनीति में संभवतः पहली बार ही हुआ है कि कोई मुख्यमंत्री चुनाव हार गया हो और उसकी पार्टी सरकार बनाने में कामयाब हो रही हो। ममता बनर्जी की हार से टीएमसी में जश्न फीका हो गया।

कभी ममता बनर्जी के निकट सहयोगी रहे शुभेंदु अधिकारी ने टीएमसी का साथ छोड़ भाजपा में शामिल होने का ऐलान किया था। उसी समय मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने नंदीग्राम से चुनाव लड़ने का ऐलान किया और दंभ भरा था कि वे शुभेंदु अधिकारी को हराकर इस बगावत का बदला लेंगीं। लेकिन ऐसा संभव नहीं हो पाया और अधिकारी परिवार के गढ़ माने जाने वाले इस क्षेत्र में ममता बनर्जी थोड़े अंतर से चुनाव हार गई। अब राजनीतिक समीक्षक इस बात का पता करने में लगे हैं कि जब मुस्लिम वोट बैंक का एक साथ हो जाना, महिलाओं का ममता के प्रति स्नेह और पर्याप्त मात्रा में विधायकों की संख्या होने के बाद भी नंदीग्राम से ममता क्यों हार गई?

भाजपा ने एक बड़ा राजनीतिक गेम खेला था। जिसके तहत शुभेंदु अधिकारी को ही ममता के सामने चुनाव मैदान में उतारा। भाजपा के सामने शुभेंदु को लेकर कई विकल्प तैयार थे लेकिन उन्होंने चुनाव जीतकर एक इतिहास दर्ज कर दिया। राजनीतिक इतिहास में किसी मुख्यमंत्री का आम चुनाव में हारना यह पहली घटना है। इसका श्रेय शुभेंदु अधिकारी को जा सकता है।

ममता बनर्जी का विधानसभा चुनाव हारना राजनीतिक रूप से एक बड़ा घटनाक्रम है। इसके बावजूद उनकी पार्टी की ऐतिहासिक जीत ने इस विषय को अधिक चर्चा में लाने से रोक दिया  विपक्षी नेताओं के बधाई संदेशों के कारण भी ममता की हार चर्चा का विषय नहीं बन पाई। लेकिन कुछ समय बाद राजनीतिक क्षेत्रों में इस घटनाक्रम पर चर्चा होगी और समीक्षक अपने विचार इस विषय पर अवश्य लिखेंगे। ममता बनर्जी का चुनाव हारना और अपनी पार्टी को पिछली बार से अधिक बहुमत दिलाना दोनों ही महत्वपूर्ण समीक्षक घटना है। यहां चुनावी रणनीतिकार पीके की बात करना भी उचित होगी क्योंकि उन्होंने जो रणनीति बनाई थी उसमें सबसे बड़ी चूक ममता बनर्जी की हार ही मानी जाएगी।

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