‘कारसेवकों’ पर गोलियां फिर भी मुलायम को ‘पद्म विभूषण’

भोपाल (सुरेश शर्मा)। लगता है नरेन्द्र मोदी अटल बिहारी बाजपेयी बनने की राह पर चल दिये हैं। अटल जी के लिए कहा जाता था कि अच्छे नेता लेकिन गलत पार्टी में हैं। मतलब सबके लिए सम्मानीय थे अटल जी। इसका कारण यह है कि अटल जी ने सभी नेताओं को सम्मान दिया और बदले में वे उनको सम्मान देते थे। अटल जी राजनीति में होने के बाद भी अपने मान्य सिद्धान्तों को बनाये रखने के लिए सत्ता के गणित में नहीं उलझते थे। यही कारण है कि बिकाऊ माल होते हुए भी उन्होंने एक वोट से सरकार को गिर जाने दिया। इन दिनों नरेन्द्र मोदी की राजनीति को देखकर भी ऐसे ही अनुमान लगाये जा रहे हैं कि वे अटल जी की भांति महानायक बनने की कसरत कर रहे हैं। यह बात इसलिए कही जा रही है कि पिछले दिनों पद्म पुरस्कारों को ऐलान हुआ और उसमें मुलायम सिंह यादव का नाम देखकर आश्चर्य का कोई ठिकाना नहीं रहा। अब यहां मुलायम सिंह यादव देश के पूर्व रक्षा मंत्री नहीं यूपी के पूर्व मुख्यमंत्री हैं। यूपी के उस समय के मुख्यमंत्री जब कारसेवक रामलला का मंदिर बनवाने की मांग का आन्दोलन चला रहे थे। उनके आन्दोलन की बाधा मुलायम सिंह यादव रहे। उन्हीं दिनों की राजनीति में मुलायम को मुस्लिम पक्षधर मानकर मुल्ला मुलायम कहा जाने लग गया था। ऐसा संघ और भाजपा के नेता ही अधिक कहते थे।

इसके बाद कारसेवा का दौर आया। जिसमें मुलायम सिंह यादव की भूमिका को लेकर सवाल उठते थे। आखिरकार वह दिन भी आ गया जिसमें कारसेवा का चरम सामने था। मुलायम सिंह यादव के आदेश पर ही पुलिस ने गोलियां चलाईं और कारसेवकों के खून से अयोध्या की गलियां लाल हो गई थीं। चित्कार ने आकाश को गुंजमान कर दिया था। कोठारी बंधुओं की शहादत को पूरा देश नमन कर रहा था। वे मुलामय के आदेश के बाद चली गोलियों का ही शिकार हुये थे। पूरे देश में मुलायम सिंह के कृत्यों की आलोचना करने से भाजपाई नहीं थकते थे। अब श्रीराम का मंदिर बन रहा है। भोपाल में रामकथा चल रही है जिसमें शंकराचार्य रामभद्राचार्य महाराज कथा वाचन कर रहे हैं। उन्होंने एक प्रसंग में कह दिया कि मुलायम सिंह यादव के कृत्य ऐसे थे  कि उन्हें स्वर्ग में स्थान तो नहीं मिला है। इसी के बीच यह समाचार आया कि केन्द्र की नरेन्द्र मोदी की सरकार ने उन्हें पद्म विभूषण से अलंकृत करने का निर्णय किया है। मोदी के सामने पूरे देश का भाजपाई मौन है। संघ के उन नेताओं की भी हिम्मत जवाब दे रही है जो मुल्ला मुलायम कहा करते थे।

खैर! मुलायम सिंह यादव को मुल्ला कहने या न कहने के कारण पुरस्कार का निर्णय नहीं होना चाहिए। लेकिन राम भक्त कारसेवकों को गोलियों का प्रसाद देने वाले मुलायम को इतना बड़ा पुरस्कार देने के कारणों की जानकारी जरूर उन राम भक्तों को दी जाना चाहिए जिन्होंने जीवन का बलिदान दिया और बलिदानियों के साथ जय श्रीराम का उद्घोष किया। यह ऐसा समय और निर्णय है जो नरेन्द्र मोदी को अटल बिहारी वाजपेयी बनने की राह पर भी ले जा सकता है और वर्तमान राह से डिगा भी सकता है। जो भी हो कारसेवक और रामभक्त यह तो जानना चाहेगा ही कि आखिर मुलायम सिंह को भाजपाई सरकार द्वारा पुरस्कृत करने का आधार क्या है?

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