‘औरंगजेब’ आर्दश है तब यह है जले पर ‘नमक’

भोपाल (सुरेश शर्मा)। भारतीय राजनीति में जब भी मुख्तार अब्बास नकवी की नाम सामने आता है तब एक धारणा स्वमेव सामने आ जाती है कि हास्य और अनुप्रास अलंकार की तुकबंदी में अपनी बात कहने वाला एक व्यक्ति। वे आजकल केन्द्र सरकार के अल्पसंख्यक विभाग के मंत्री हैं तो उनके कंधे पर भाजपा की सरकार के कारण बड़ी जिम्मेदारी है। जब देश में हिन्दू समाज की ओर से आये दिन मस्जिदों में पुराने मंदिर होने की बात सामने आ रही हो और यह संदेश जा रहा हो कि इसमें सरकार का रूख अप्रत्यक्ष रूप से ही सही समर्थन का ही दिख रहा है तब नकवी साहब की परेशानी और बढ़ जाती है। लेकिन तर्क और तुकबंदी के कारण वे इससे बच निकल जाते हैं। पिछले दिनों भी ऐसा ही वाक्या हुआ। एक साक्षात्कार में उनसे सवाल पूछा गया कि ज्ञानवापी में शिवलिंग का मामला और मुस्लिम समाज की स्थिति पर आपका क्या कहना है? तब नकवी साहब ने सहज जवाब दिया। उन्होंने कहा कि जिनको औरंगजेब आदर्श लगता है वे देश के जले पर नमक छिडक़ रहे हैं। मंत्री का सयंम देखिये कि उन्होंने पाकिस्तान भेजने की आम भाषा को पास में भी नहीं आने दिया। इस प्रकार से बड़ा संदेश देने की स्थिति में भी मंत्री जी आ गये और विश्व को यह बता दिया कि औरंगजेब का भारत के मुसलमानों से क्या लेना-देना?

देश में इन दिनों चल रही राजनीति और सामाजिक परिस्थितियों पर जितनी नजर डाली जाती है उतना ही असर अलग से दिखाई देता है। कुछ मुस्लिम (मुगल) शासकों ने फरमान जारी करके हिन्दू मंदिरों को तोड़ा और वहां मस्जिद का निर्माण कराया। हालांकि यह इस्लाम की पवित्रता के लिहाज से सही नहीं है। मस्जिद अपनी ही जमीन पर बन सकती है। लेकिन इस प्रकार की घटना के बाद मस्जिदों का निर्माण इन दिनों जायज ठहराया जा रहा है। ज्ञानवापी के मामले में तो असहज स्थिति सामने आ रही है। जहां वजू किया जाता है वहां पर प्राचीन और ज्योतिर्लिंग के नाम से प्रसिद्ध शिवलिंग मिला है। उसको खंडित करने का प्रयास भी किया गया लेकिन सफलता नहीं मिली। नंदी बाबा पहले से ही उनको निहार रहे हैं। स्वयं भगवान शिव का इससे संबंध बताया जा रहा है जो ग्रंथों में लिखा हुआ भी है। ऐसे में यह सामाजिक विवाद का नहीं बल्कि सहिष्णुता का विषय बन जाता है। गंगा जमुनी तहजीब का मामला बन जाता है। लेकिन इस पर औरंगजेब को आदर्श मानने का सिलसिला चल रहा है। इसी बात पर मंत्री ने टिप्पणी की है और चेताया है।

विचार करने वाली बात यह है क्या हिन्दू समाज को इसके बाद भी दोषी ठहराया जा सकता है जब उसे यह मालूम चला कि उसके आराध्य को वजू के स्थान पर दबाकर रखा गया और सबकी जानकारी में होने के बाद भी आजादी के पच्चहर वर्ष बाद कोई सहयोग करने को आगे नहीं आया। जब न्यायालय ने सर्वे का आदेश दिया तब सब सामने आया और उसमें औरंगजेब को आदर्श मानने वाले मुस्लिम नेता यह दावा कर रहे हैं कि यह तो उनका फव्वारा है। जले पर नमक छिडक़ा जा रहा है। देश की प्राचीन संस्कृति को धत्ता बताने का प्रयास किया जा रहा है। आने वाले समय में न्यायालय सबकी बात सुनने के बाद निर्णय देगा जिसकी सबको प्रतीक्षा है।

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