‘एग्जिट पोल’ पर घमासान मानने वाले ज्यादा ‘वे कम’

भोपाल। अच्छा एक बात बताईये चुनाव के परिणाम आने से पहले कोई हार मान सकता है? नहीं ना। तब आप यह अपेक्षा कैसे कर सकते हैं कि उग्जिट पोल से पहले ही यह मान लिया जाये कि मोदी की सरकार बन रही है। सरकार बनाने और न बनाने का आदेश देश का मतदाता दे चुका है। एग्जिट पोल में संभावनायें हैं। पूर्वानुमान है। इस अनुमान में अभी तक यह स्थिति तो रही है कि जिस दिशा में अपेक्षा जताई गई थीं वे ही सही सिद्ध हुईं। सीटों की संख्या में समानता नहीं रह पाती। लेकिन मध्यप्रदेश विधानसभा के चुनाव में आजतक का एग्जिट पोल मुझे आज भी याद है। उसने भाजपा और कांग्रेस का एक संख्या दी थी। जब परिणाम आये तो महज पाचं सीटों का अन्तर रहा। कांग्रेस 114 और भाजपा 109। यदि सभी एग्जिट पोल को मिलाकर भी देखते हैं या अलग-अलग देखते हैं तब कोई भी सर्वे ऐसा नहीं है कि राजग की सरकार बनने की संभावना को इंकार कर रहा हो। सभी में मोदी सरकार की संभावना जताई जा रही है। इन एग्जिट पोल को मानने वालों की संख्या अधिक है लेकिन विरोधी दल और एक विशेष किस्म का तबका यह मान रहा है कि अभी भी आस हो सकती है। विरोधी दलों के नेताओं को भी आस दिख रही है कि यदि पूरे देश के गैर भाजपाई मिल जायें तब मोदी को रोका जा सकता है।
दिक्कत भाजपा या राजग की सरकार बनने में नहीं है। दिक्कत जिस प्रकार का विकास मोदी सरकार में हुआ है उसमें भी नहीं है। दिक्कत मोदी के प्रधानमंत्री बनने में है। इसका कारण यह है कि मोदी ने उन सभी छिद्रों को बंद कर दिया जिनके माध्यम से राजनीति के कीड़ अपना पेट भरते थे। गरीब के खाते में सीधी सहायता का प्रावधान कर दिया। किसानों को मिलने वाली राहत अब खाते में जाती है। सबसिडी की रकम बिचौलियों की पहुंच से दूर हो गई। इसलिए यहां शोर है। जिनके काम ही सरकारी अनुदान से चलते थे। गरीबों के नाम पर महफीलें इनकी जमती थी वे लुटियंस आज दहाड़ मार रहे हैं। इसलिए सबकी अपेक्षा यह है कि मोदी को प्रधानमंत्री न बनाने के लिए जितने जतन किये जा सकते हैं करें। पूरा विपक्ष एक ही व्यक्ति के पीछे पड़ गया। देश का स्वभाव रहा है कि वह उस व्यक्ति को ताकतवर मानता है जो सभी से भिड़ भी सकता है और सबकी आलोचना को सह भी सकता है। मोदी अब आम आदमी की आवाज में आ गया है। इसलिनए चुनाव परिणाम की अपेक्षा को ही एग्जिट पोल दिखा रहे हैं। ऐसा मानने वालों की संख्या अधिक है।
इलेक्ट्रानिक मीडिया की पुहंच अधिक हो गई। लोगों ने मुखरता से बोलना शुरू कर दिया इसलिए सब समझ में आता है। गांव के उस व्यक्ति को पता चल गया है कि बाकी नेता मोदी का विरोध क्यों कर रहे हैं? सच में लगता है कि मेरा देश बदल रहा है आगे बढ़ रहा है। मोदी को रोकने वालों का प्रतिशत कम है लेकिन कमान देने वालों की संख्या अधिक है। देश जिस दिशा में चला है वह दिशा ही सही दिशा है। जिस देश में ईमान रहा है वहां ईमान की बात होती है। बेईमानी को पाप समझा जाता था। जहां सहयोग खून में रचा हो वहां सहयोग की भावना आ रही है। इसलिए मोदी अनुकूल है और मोदी मुमकिन है। विरोध करने वाले जल्द शान्त हो जायेंगे।

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