उमा, प्रहलाद और विजयवर्गीय को चुनाव जिताने की जिम्मेदारी दी, संघ करेगा जीत में सहयोग

भोपाल। [विशेष प्रतिनिधि] चौथी बार सरकार बनाने के लिए भाजपा ने कमर कस रखी है। संघ ने अपना दखल बढ़ा रखा है और पूरी निगरानी भी संघ की ओर से रखी जा रही है। नेतृत्व ने यह तय किया है कि जिस भी नेता का प्रदेश की राजनीति में प्रभाव है वे सभी चुनाव प्रचार का जिम्म्ेदार तो संभाले ही अपने प्रभाव के क्षेत्र में प्रत्याशियों को जिताने में योगदान भी दें। इसलिए उमा भारती को फिर से प्रदेश में स्िरकय करने का निर्णय हुआ है। उमा जी ने इसके लिए स्वीकृति भी दे दी है। वे बुन्देलखंड में भाजपा की सीटें बढ़ाने का काम करेंगी। मालवा निमाड में विशेष प्रभाव रखने वाले कैलाश विजयर्गीय को उस क्षेत्र में और सीटें दिलाने का प्रयास करने के लिए कहा गया है। महाकौशल में विशेष ताकत रखने वाले प्रह्लाद पटेल को भी उस क्षेत्र में कमलनाथ का प्रभाव कम करने का दायित्व दिया गया है। ये सभी नेता प्रदेश के साथ अपने दायित्व वाले क्षेत्र में भाजपा को पहले से अधिक सीट दिलाने का काम करेंगे।
मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान पूरे प्रदेश को देंखेंगे। लेकिन वे मध्य के विधानसभा सीटों को पहले से अधिक बढ़ाने के लिए प्रयास करेंगे। केन्द्रीय मंत्री नरेन्द्र सिंह तोमर अपनी टीम के साथ ग्वालियर और चंबल अंचल में भाजपा को अधिक ताकतवर करने में लग गये हैं। उनके साथ उनकी टीम होगी। विन्ध्य में अतुल राय, भगवतशरण माथुर और राजेन्द्र शुक्ल को लगाया गया है। टिकिट वितरण से लगाकर सीट जीतने में ये महत्वपूर्ण भूमिका निभायेंगे।
उमा भारती की क्षमताओं को पूरा देश जानता है। वे देश की नेता हैं। लेकिन मध्यप्रदेश की मुख्यमंत्री रहने और प्रदेश में कांग्रेस को स्थाई रूपय से उखाड़ फंैकने में उनकी भूमिका की अनदेखी नहीं की जा सकती है। वे पूरे प्रदेश में समाजिक समीकरणों के साथ भाजपा को जिताने में योगदान देंगी। उन्हें बुन्देलखंड में भाजपा की ताकत को और अधिक करना है। वैसे भी उमा जी अपने भतीजे सिद्धार्थ को विधानसभा का चुनाव लडऩा चाहते हैं और कांग्रेस के विधायक वाली खडग़ापुर सीट से वे प्रत्याशी हो सकते हैं।
 कमलनाथ के प्रभाव वाले क्षेत्र महाकौशल में भाजपा ने अपने तेज तरार नेता प्रह्लाद पटेल को जिम्मेदारी दी है। उनके साथ प्रदेश अध्यक्ष राकेश सिंह भी योगदान देंगे लेकिन पटेल को ही वहां जीत का सूत्रधार बनाया है। सभी क्षेत्रों में अपने कार्यकर्ता रखने वाले पटेल ने भी चुनौती को स्वीकारा है। वे इस प्रकार की चुनौतियों को स्वीकार करने के आदि हैं। यह माना जा रहा है कि भाजपा इस क्षेत्र में अपनी सीटों को बढ़ाने की स्थिति में रहेगी। कुछ स्थान तो ऐसे हैं जो भाजपा जीतती रही है लेकिन पिछले चुनाव में हार गई। इस बार उसे वापस लेने का प्रयास किया जायेगा।
भाजपा के सामने मालवा को संभालना और कमलनाथ और सिंधिया के क्षेत्रों में उनका प्रभाव को कम करना प्रमुख रूप से है। कैलाश विजयवर्गीय के मालवा में सक्रिय होने का अपना प्रभाव पड़ेगा। इस प्रकार की रणनीति भाजपा की जीत की संभावनाओं का अधिक प्रभावशाली बना रही है। कार्यकर्ता की निराशा समाप्त होती दिखाई दे रही है। इसलिए संघ ने बीच में हस्तक्षेप करके यह जता दिया है कि चुनाव जीतने के लिए कोई भी नेता या कार्यकर्ता कोताही नहीं बरते। यह चुनाव हस्तक्षेप चुनाव के बाद भी जारी रहेगा और कार्यकर्ताओं की सुनी जायेगी।

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