आहारचर्या उत्तम दिनचर्या

संस्कृति में संस्कार निकलते हैं और वे मानव जीवन की रचना करते हैं। संस्कार रहित जीवन के मायने उतने नहीं हो सकते जो संस्कारयुक्त जीवन के रहते हैं। यदि मानव में इसका विश£ेषण किया जाये तब मानव और दानव की कल्पना निलती है। कहा गया है कि जैसा खाए अन्न वैसा होगा मन। इसलिए मनुष्य के जीवन में आहार चर्या का बड़ महत्व होता है। हम दिन का प्रारंभ सूर्योदय से पहले उठने और सैर व्यायाम से करते हैं। उसके बाद स्नान और ध्यान को अपनाते हुए भोजन की तरफ बढ़ते हैं। हालांकि शास्त्रों में भोजन का वर्णन अलग प्रकार और तरीकों से करने का उल्लेख है। फिर भी शास्त्रों का संपूर्ण परिपालन गहस्थ जीवन में संभव नहीं होता। ऐसी स्थिति में विज्ञान के महत्व और जरूरतों को ध्यान में रखकर व्यवस्थाएं की गई हैं जिसमें कुछ छूट भी है और कुछ निर्देश भी। हम यदि इन सामान्य निर्देशों का पालन कर लेंगे तब भी हमारा पूरा दिन भी ठीक जायेगा और हम अधिक समय तक स्वस्थ्य भी रह पाएंगे। तब आइये इन सुझावों से रूबरू होते हैं।

भोजन का तरीका
सबसे पहली बार यह ध्यान रखने की होती है कि आप भोजन कहां और किस प्रकार से कर रहे हैं? पहले भोजन लकड़ी के पटे पर थाली रखकर करने की परम्परा थी। इसको भोजना शुद्ध स्थान पर हो गया यह भी तय हो गया और पोष्टिकता से परिपूर्ण हो गया यह भी तय था। इसका वैज्ञाानिक आधार है। आधार यह है कि पृथ्वी में गुरूत्वाकर्षण होता है और वह वस्तु और तत्व को अपनी ओर खींच लेती है। वैज्ञानिकों का मानना है कि भोजन की थाली यदि जमीन पर सीधे रखकर भोजन किया जायेगा तब उसके पोषक तत्व पृथ्वी की गुरूत्वाकर्ष शक्ति के द्वारा समाप्त हो जायेंगे और भोजन से पेट तो भर जायेगा लेकिन मिलने वाले तत्वों की कमी हो जायेगी। इसलिए हमारे समाज मनिशियों द्वारा पटे पर थाली रखकर भोजन करने का प्रचलन प्रारंभ कर दिया गया था। हमारे संंस्कारों में भारतीय संस्कृति के संस्कारों को ढ़ोंग जैसा तरीका बताने का जहर घोलने वाले तो अपना काम कर गये लेकिन अंग्रजों या विदेशों से ही सीख लेने की आदत वाले पाश्चात्य प्रेमियों को यह समझ लेना चाहिए कि डाइनिंग टेबल भी उसी पटे स्वरूप का विस्तृत संस्करण है। इसमें एक ही टेबल पर खाना खाने की व्यवस्था है जबकि हमारे संस्कारों में अलग-अलग पटे पर भोजन करने लेकिन परिवार भाव से साथ भोजन करने का प्रावधान था। इसलिए वैज्ञानिक कारणों का समझते हुए भोजन करने का पहला तरीका यही मानना चाहिए कि थाली सीधे पृथ्वी के संपर्क में न आये लकड़ी जो किसी भी गुरूत्वाकर्षण रोधक है उसी का थाली और पृथ्वी के बीच में अवरोध बनाकर भोजन करना चाहिए।

कब करना चाहिए भोजन
भोजन शरीर की जरूरत होती है। लेकिन भोजन ग्रहण करने के लिए जरूरी बातों का ध्यान रखना चाहिए ताकि भोजन पाच्य बन सके। इसलिए सुबह 10 बजे से 11 बजे के बीच में भोजन कर लेना चाहिए। इससे दिन भर काम करने की ऊर्जा शरीर को मिल जायेगा। दिन का भोजन दिन भर की शारीरिक मेहनत के आधार पर अच्छी मात्रा में करना चाहिए। जबकि रात्रि का भोजन हल्का और सुपाच्य होना चाहिए। रात्रि का भोजन सोने से दो-तीन घंटे पहले करना चाहिए। अच्छी तरह से भूख लगने पर ही भोजन करना चाहिए लेकिन नाश्ते और भोजन का समय निर्धारित करके करने से वह अधिक लाभ देता है। व्यवस्थित बैठकर भोजना करना चाहिए। खड़े होकर या घूमते हुए भोजन नहीं करना चाहिए। चबा-चबा कर भोजन करने से पाचन सही होता है क्यों बाद में दातों का काम आंतों का करना पड़ेगा जो पाचन में गडबड़ी पैदा करेगा। ज्यादा चबाने से लार भी अधिक मिलेगी जिससे पाचन सही होगा। भोजन शान्त स्वभाव करना चाहिए। उचित तो यह भी रहता है कि उस समय न तोटीवी देखा जाये और न ही समाचार पत्र का पाठन होना चाहिए। मोबाइल को बिलकुल नजदीक नहीं होना चाहिए। भोजन भूख से कम करने पर शरीर अधिक स्वस्थ्य रहता है। ध्यान रखने की बात यह भी है कि भूख लगने पर पानी और प्यास लगने पर भोजन नहीं करना चाहिए। भोजन से पहले और तुरन्त बाद पानी नहीं पीना चाहिए। इससे भोजन को पचाने की क्रिया गड़बड़ा जीती है। भोजन प्रारंभ में मीठा, मध्य में नमकीन और अन्त में कसैले पदार्थों को खाना चाहिए। भोजन करने से पहले केला और ककड़ी का सेवन नहीं करना चाहिए। यह आयुर्वेद की मान्यताएं हैं। भोजन में दुध, दही और छाछ का उपयोग लाभकारी होता है। भोजन के तुरन्त बाद क्रोध और व्यायाम नहीं करना चाहिए।

भोजन के बाद क्या करें और क्यान करें
लंच के बाद टहलना चाहिए और डीनर के बाद कम से कम सौ कदम चलना चाहिए। इसके बाद बाई करवट लेटने या व्रजासन करने से भोजन पाचन में सहायता मिलती है। भोजन के एक घंटे बाद मीठिा दूध और फल लेने का भी पचन ठीक होता है। भोजन के बाद तुरन्त पानी या चाय नहीं पीना चाहिए। भोजन के बाद घुडसवारी, बैठना, लेटना और सोना नहीं चाहिए।
यदि आपने आहार चर्या को ठीक से कर लिया तो दिनचर्या में किसी भी प्रकार की बाधा नहीं आयेगी? भोजन हमेशा स्वस्थ्य और एनर्जी को बनाये रखने के लिए किया जाता है इसलिए भोजन करते समय स्वाद का कम सेहत का अधिक ध्यान रखा जाना चाहिए। यदि हम सुपाच्य भोजन के साथ इन जरूरी सावधानियों का ख्याल रख लेंगे तो हम न केवल स्वस्थ रहेंग हमारा काम करने में भी मन लगेगा और हम आर्थिक पक्ष को सुदृढ़ करने की दिशा में कुछ कदम अधिक बढ़ सकते हैं।

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