अब तक जारी नहीं हो पाया शिक्षक पात्रता भर्ती परीक्षा का रिजल्ट, नए सत्र से पहले नहीं हो पाएगी भर्ती

भोपाल। प्रदेश में नया शिक्षा सत्र शुरू होने में कुछ दिन रह गए हैं और शिक्षकों की नियुक्ति अधर में लटकी है। यह स्थिति इसलिए बनी है क्योंकि मध्यप्रदेश प्रोफेशनल एग्जामिनेशन बोर्ड (पीईबी) शिक्षक पात्रता भर्ती परीक्षा का रिजल्ट अब तक नहीं जारी कर पाया है। बता दें कि उच्च और माध्यमिक शिक्षक पात्रता भर्ती परीक्षा दिसंबर और फरवरी में कराई गई थी। करीब 30 हजार पदों को भरे जाने के लिए आयोजित इस परीक्षा के लिए 7 लाख आवेदन आए थे। 
इनमें से करीब 5 लाख अभ्यर्थी परीक्षा में शामिल हुए थे। परीक्षा हुए 5 माह बीत चुके हैं, मगर रिजल्ट को लेकर अफसर गंभीर नहीं हैं। अब पीईबी अधिकारियों का दावा है कि उच्च शिक्षा भर्ती परीक्षा का परिणाम 30 जून और माध्यमिक शिक्षक भर्ती परीक्षा का रिजल्ट 15 जुलाई तक जारी किया जाएगा। पीईबी का कहना है कि परीक्षा परिणाम तैयार हो रहे हैं। गौरतलब है कि प्रदेश के सरकारी स्कूलों में शिक्षकों की कमी लंबे समय से बनी हुई है। इसके बाद भी पिछले पांच साल से शिक्षकों की नियुक्ति प्रक्रिया चल रही थी, जो पिछले साल चुनाव की वजह से आनन-फानन में शुरू की गई थी, लेकिन अब उसका रिजल्ट अटका हुआ है, जबकि पीईबी अब सभी परीक्षाएं ऑनलाइन कराता है। ऑनलाइन परीक्षा कराने के पीछे उद्देश्य गड़बडिय़ों को रोकना और समय पर परीक्षाओं के परिणाम जारी करना था। इधर, पीईबी किसी भी परीक्षा का परिणाम समय पर जारी नहीं कर पा रहा है। इससे परीक्षार्थी परेशान हो रहे हैं और नियुक्ति प्रक्रिया लेट हो रही है। उच्च माध्यमिक शिक्षक के 19220 और माध्यमिक शिक्षक के 11374 पदों के लिए परीक्षा हुई थीं। वर्ग-2 के लिए करीब 4.50 लाख और वर्ग- 1 के लिए 2.25 लाख आवेदन आए थे। इनमें से करीब 5 लाख परीक्षार्थियों ने एग्जाम दिया था, जिसके परीक्षा परिणाम का इंतजार किया जा रहा है।
प्रदेश में शिक्षकों के एक लाख पद खाली 
प्रदेश में शिक्षकों के इस समय करीब एक लाख पद रिक्त हैं। आलम यह है कि कई स्कूलों में महज एक शिक्षक पदस्थ है तो कुछ स्कूल पूरी तरह अतिथि शिक्षकों के भरोसे चल रहे हैं। व्यापमं घोटाले के कारण सरकार ने पिछले पांच सालों से व्यापमं के माध्यम से वर्ग एक, दो और तीन की भर्तियां नहीं हुई है। इस समय वर्ग एक में लगाग 27 हजार, वर्ग दो में 27 हजार और वर्ग तीन में चालीस हजार के करीब शिक्षकों के पद रिक्त हैं। अधिकांश स्कूल भी प्रभारी प्राचार्यों के भरोसे चल रहे हैं।

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